थाइम भूमध्यसागरीय गर्म, शुष्क पहाड़ी पर जंगली रूप से उगाया जाता है, जहां इसका स्वाद ठंडे क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक होता है। यह एक प्रकार की औषधी वनस्पती है. पुराने जमाने मे इसका उपयोग शव के उपर रखने मे कीया जाता है . और तो इसका उपयोग मंदीरोमे धुप करने मे इसका उपयोग किया जाता था . आज थाइम रसोईका स्वाद बडाने मे मदत करता है . और कई प्रकार के औषधी बनाने के लिये इसका उपयोग होता है. थाईम की चाय भी बनाके पीते है . इसका स्वाद पूरे पौधे में गर्म, मिट्टी जैसी और मिर्च जैसी सुगंध आती है। स्वाद मसालेदार है, जिसमें लौंग और पुदीना, थोड़ा कपूर और मुंह को साफ करने वाला स्वाद होता है। थाइम की कई किस्में रसोइये को विभिन्न स्वादों का खजाना प्रदान करती हैं।
थाइम में अच्छी मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, कैल्शियम, सोडियम, विटामिन सी, विटामिन ए मौजूद होता है। इसके अलावा एंटीऑक्सीडेंट होता है जो बीमारियों से बचाव करने में मदत करता है।
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