हम ब्रँडी के बरे मे जनेंगे, ब्रांडी 🍇अंगूर के ज्यूस से बनती, अंगूर के जूस मे येस्ट डालकर उसे कुछ दिन ऐसे ही रखते है, इस प्रक्रिया को fermentation कहते। है , (यिस्ट शुगर को खाकर शराब(अल्कोहल) में बदल देता है, ) उसके बाद उसे डिस्टिल करते है , याने उस तरल पदार्थ को उबालते है, उसके बाद जो बाफ निकलकर ठंडी होती , उसका जो लिक्विड तयार होता है उसे डिस्टिल प्रक्रिया कहते है। उसमे कभी कभी caremal डालकर उसे सुनेहरा कलर देके बाजारों में बेचने के लिए तयार करते है। या फिर उस लिक्विड को किसी लकड़ी के संदूक में कुछ महीने रखते है , उसे (oak wood cask) कहते हैं, ऐसा करने से ब्रांडी को एक अलग स्वाद आता है,और नैसर्गिक रंग याने सुनेहरा गोल्डन कलर जैसा होता है,अंगुर के ज्युस के अलावा, ब्रांडी सफरचंद, चेरी, प्लम से भी बन सकती है, अगर ब्रँडी किसी फल के ज्यूस से बानेगी तो ऊस बोत्तल पर ऊस फल का नाम आयेगा, जैसे apple से बनेगी तो apple ब्रांडी लिखेंगे, पर अंगुर के ज्यूस से बनेगी तो उस पर खाली ब्रांडी लिखेंगे ,
ब्रांडी के खाना खाने से पहले या फिर खाना खाने के बाद पीना चाहिए , क्यों की वह बहुत ही dry हाेती हैं, यहां dry का मतलब सूखा नही है , एक उदाहरण देते हुए, जब आप बिना शक्कर के काली चाय बहुत ज्यादा मात्रा में चाय पत्ती डालकर पीते हो , और जो उसका स्वाद आप को आएगा उसे spirit के भाषा में dry कहते है, वह आपके पूरे मुंह का स्वाद बिगड़ सकता है, उसे dry कहते है , इसीलिए ब्रांडी को खाना खाने के बाद पीना चाहिए, ब्रांडी को बिना किसी मिलावट के ही पीना चाहिए याने उसमे कुछ भी नही मिलना चाहिए, आप जिस ग्लास में ब्रांडी पीते ही उसे पहिले गरम पानी डालकर थोड़ा उस ग्लास को गरम कर लेना चाहिए, ऐसा करने से उसका स्वाद बहुत अच्छा आता है। क्या है ब्रांडी
।।धन्यवाद।।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें